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रायपुर : बदली जिंदगी, बढ़ा आत्मविश्वासः श्रीमती रजनी उइके बनीं ‘लखपति दीदी

  पोल्ट्री फार्म, फोटो कॉपी एवं चॉइस सेंटर से साकार हुआ आत्मनिर्भरता का सपना आर्थिक सशक्तिकरण से संवरता परिवारः स्वरोजगार ने दी स्थायित्व और...

 

बदली जिंदगी, बढ़ा आत्मविश्वासः

पोल्ट्री फार्म, फोटो कॉपी एवं चॉइस सेंटर से साकार हुआ आत्मनिर्भरता का सपना

आर्थिक सशक्तिकरण से संवरता परिवारः स्वरोजगार ने दी स्थायित्व और सम्मान की नई पहचान

रायपुर, 13 अप्रैल 2026

आर्थिक सशक्तिकरण से संवरता परिवारः स्वरोजगार ने दी स्थायित्व और सम्मान की नई पहचान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अंचलों की महिलाएं अब केवल घरेलू दायित्वों तक सीमित न रहकर स्वरोजगार की दिशा में अग्रसर हो रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बतारी की निवासी श्रीमती रजनी उइके की सफलता की कहानी इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है।

श्रीमती रजनी उइके ने स्नातक (बी.ए.) तक की शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे केवल गृहिणी बनकर सीमित नहीं रहना चाहती थीं, बल्कि अपने दम पर कुछ नया करने का संकल्प उनके मन में था। वर्ष 2022 उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया, जब उन्हें बिहान योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने ‘जय लक्ष्मी स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ा। स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें आरएफ मद से 8 हजार रुपए एवं सीआईएफ मद से 30 हजार रुपए की सहायता प्राप्त हुई। साथ ही बैंक से 1.5 लाख रुपए का ऋण लेकर उन्होंने अपने घर में ही पोल्ट्री फार्म, फोटो कॉपी एवं चॉइस सेंटर जैसे व्यवसायों की शुरुआत की।

आज श्रीमती उइके इन सभी व्यवसायों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। उनके प्रयासों से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। वर्तमान में उनकी वार्षिक आय लगभग 1 लाख 10 हजार रुपए तक पहुंच चुकी है, जिससे वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं। वह बताती हैं कि पहले उनके परिवार की जिम्मेदारी केवल उनके पति पर थी, लेकिन अब वे स्वयं भी आर्थिक रूप से सहयोग कर रही हैं। इससे उनका परिवार सशक्त और आत्मनिर्भर बना है। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और अब वे किसी पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं ने उन्हें रोजगार का अवसर प्रदान किया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।

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